दोस्ती
फिर तकदीर ने एक बार हमे उस चोराहे पर मिलाया है,
येही थी वो गलियाँ और येही थे वो रास्ते |
पर नजाने क्यौ वो आज जानते हुए भी अंजाने लगते है
समझ नहीं आता की तुझे मिलने की खुशी है, या तुझसे बिछड्ने का गम |
वक़्त बदल गया, बदल गयी यह सारी दुनिया,
पर तेरी दोस्ती का दामन आज भी याद आता है |